खुबसूरत बहन

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम मयंक है और में हरियाणा का रहने वाला हूँ.. में बहुत समय से इस साईट पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और ज्यादातर सेक्स के तरीके पर ज्यादा ज़ोर देता हूँ और बहुत मज़े भी करता हूँ.. लेकिन में जब भी कहानी पढ़ता हूँ तो मेरा भी मन करता है कि में भी कभी अपनी बहिन के साथ सेक्स करूं और यह घटना अभी कुछ दिन पहले की है.. लेकिन दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है तो अगर मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो मुझे माफ़ करना। दोस्तों में कुछ अपने बारे में भी बता देता हूँ.. में एक कॉलेज से बीटेक के तीसरे साल का स्टूडेंट हूँ और मेरी उम्र 20 साल है.. में दिखने में ठीक ठाक हूँ और मेरे लंड का साईज 6.5 इंच है और में चूत का बहुत बड़ा शौक़ीन हूँ। यह घटना मेरी और मेरे मामा की लड़की की है.. उसका नाम ईशा है और वो अब बीकॉम के पहले साल में है। वो दिखने में बहुत सुंदर और मोटे मोटे बूब्स और गांड तो बस देखने से ही अच्छे अच्छो के लंड खड़े हो जाते है।

हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और एक दूसरे से सभी तरह की बातें शेयर करते थे.. लेकिन बस सेक्स की बातों को छोड़कर.. में उसका साईज भी आप सभी को बता दूँ.. उसका साईज 34-28-36 है और यह कुछ दिन पहले की बात है.. में अपने कॉलेज की छुट्टियाँ बिताने के लिए अपने मामा के घर पर आया हुआ था। तो हम दोनों सारा दिन बैठकर बातें करते रहते थे और बहुत मज़े करते थे। दोस्तों उस टाईम तक मेरे मन में उसके लिए किसी भी तरह की कोई भी ग़लत बात नहीं थी.. लेकिन फिर एक दिन मामा और मामी किसी प्रोग्राम में बाहर गये हुए थे और मुझसे घर पर रुकने के लिए बोलकर गये थे और फिर हम दोनों गेम खेलने लगे। फिर गेम खेलते खेलते अचानक से मेरा हाथ उसकी कमर पर लग गया.. लेकिन उसने मुझसे कुछ नहीं कहा.. और एक मुस्कान देकर फिर से खेलने लगे.. तो एकदम से दिल में एक अजीब सा ऐहसास हुआ और मैंने उसके हाथ पर हाथ रख दिया। तो वो एकदम से ऐसे खड़ी हुई जैसे उसको 240 वॉल्ट का करंट लग गया हो।

फिर इतना होने के बाद वो बाहर भाग गई और मुझे भी अपनी गलती महसूस हुई.. लेकिन फिर भी मेरा सेक्स का बुखार शांत होने वाला नहीं था और में उसके पीछे गया तो मैंने देखा तो वो नहाने के लिए बाथरूम में चली गई और में चुपचाप आकर टीवी देखने ल्गा। इतने में ही मुझे एक बहुत ज़ोर से आवाज़ आई जैसे कुछ गिरा हो.. तो में भागकर कमरे से बाहर गया और मैंने बाथरूम के पास जाकर देखा तो ईशा नीचे जमीन पर गिरी पड़ी है और उसका टावल भी पूरा खुला पड़ा था। दोस्तों मैंने पहली बार किसी लड़की को पूरा नंगा देखा था.. और में उसे इस हालत में कुछ देर देखता रहा और उसके पीछे का हिस्सा मुझे दिख रहा था.. मतलब उसकी कमर और गांड। फिर मैंने अपने आपको संभाला और उससे पूछा कि ईशा क्या हुआ? तो उसने मुझसे कहा कि दिखता नहीं में गिर गई हूँ.. मुझे उठाओ.. बहुत दर्द हो रहा है। तो मैंने जल्दी से उसे अपने दोनों हाथों का सहारा देकर खड़ा किया.. वो एकदम नंगी मेरी आखों के सामने थी.. उसकी चूत छोटी सी थी और उस पर हल्के हल्के बाल भी थे। बिल्कुल गुलाबी कलर की.. में उसे देखता ही रह गया। तभी उसने उठकर अपना टावल ऊपर खींच लिया और में एकदम होश में आ गया। फिर वो मुझसे बोलने लगी.. बेशर्म में तेरी बहन हूँ ऐसे घूर घूरकर क्या देख रहा है? तो मैंने अपना सर नीचे कर लिया.. तभी उसने कहा कि मुझसे चला नहीं जा रहा.. मुझे अपनी गोद में उठाओ।

तो मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले गया.. और उसे बेड पर लेटा दिया.. लेकिन अब भी उसके बूब्स हल्के हल्के दिखाई दे रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो चुका था। तो मैंने उससे कहा कि तुम सीधी लेटी रहो.. में दवाई लाता हूँ.. में दूसरे कमरे में जाकर दवाई लेकर आया और में उसकी कमर पर दवाई लगाने लगा और कमर पर दवाई लगाते हुये मेरा हाथ अचानक से उसके बूब्स पर लग गया.. तो मेरे मन में एक अजीब सा अहसास हुआ और में अपने आपको रोक नहीं पाया और मैंने धीरे से उसकी कमर पर किस कर दिया.. वो एकदम से सीधी हुई तो उसके बूब्स मेरे मुहं पर छू गये और उसे भी अजीब सा महसूस होने लगा और फिर उसने मेरा मुहं अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे होंठो पर किस कर दिया। तो अब में भी नहीं रुक सका और में भी उसे किस करने लगा और मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर था और दूसरा पेट पर.. वो अजीब सी आवाज़ निकाल रही थी उह्ह्ह अह्ह्ह और कह रही थी मुझे और ज़ोर से किस करो। तो में भी पूरे जोश में था मैंने अपनी शर्ट उतार दी और उसके बूब्स को चूमने चाटने लगा.. वो अजीब सी आवाज़ निकाल रही थी अहह मयंक और ज़ोर से चूसो.. पी लो आज इनका सारा दूध.. बहुत दिन से मेरा तुझसे चुदने का मन कर रहा था।

फिर इतने में उसने अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया। पेंट के ऊपर से ही वो मेरे लंड को रगड़ने लगी और फिर उसने मेरी पेंट को खोल दिया। तो में भी उसके सामने पूरा नंगा था और अब में उसकी गर्दन पर, पेट पर, होंठ पर, बूब्स पर बारी बारी से किस करने लगा। तो वो अब बहुत गरम हो गई फिर मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया.. वो एकदम से सिहर उठी और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी और वो बोलने लगी कि मयंक अब बस डाल दो मुझसे रहा नहीं जा रहा.. जल्दी करो और चोद दो मुझे.. फाड़ दो मेरी चूत। तो मैंने उसे सीधा लेटाया और उसकी चूत पर किस करने लगा.. वो आईइ उह्ह्ह्ह सीईई कर रही थी। फिर मैंने अपना लंड हाथ में लिया और उसकी चूत पर रख दिया और रगड़ने लगा और वो अपने आप झटके मारने लगी और लंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी.. मैंने उसके छेद पर अपना लंड रखा और हल्का सा धक्का मारा तो वो एकदम से चिल्ला उठी और बोलने लगी कि प्लीज बाहर निकालो भैया बहुत दर्द हो रहा है।

में उसकी खराब हालत को देखकर वही रुक गया और वो आवाज़ निकालने लगी आईइ अहह माँ बचाओ मार दिया मुझे और अब उसकी चूत से खून आने लगा। तो मैंने एक मिनट शांत रहने के बाद फिर से जोरदार झटका मारा.. इस बार मैंने मेरा पूरा 6.5 इंच का लंड अंदर उतार दिया। तो वो ज़ोर से बोली कि आह में मर जाउंगी प्लीज इसको बाहर निकालो.. लेकिन में कहाँ सुनने वाला था.. दो मिनट रुका और आराम आराम से झटके मारने लगा। तो वो भी चुदाई के मज़े लेने लगी और अहह उह्ह्ह माँ मर गई की आवाज़ निकालने लगी और मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और वो भी नीचे से धीरे धीरे झटके मारने लगी और मेरा पूरा साथ देने लगी। तभी थोड़ी देर बाद वो बोलने लगी कि मेरी चूत से कुछ निकल रहा है और वो उम्म अह्ह्ह की आवाज़ निकालते हुई झड़ गई.. उसकी चूत की गर्मी से में भी झड़ गया। फिर वो मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम वर्जिन थे? तो मैंने कहा कि नहीं में वर्जिन नहीं हूँ। फिर हम दोनों ने किस किया और कुछ देर लेटे रहे और फिर से हमने दो बार सेक्स किया और सो गए। सुबह उठकर एक बार फिर सेक्स किया और नहाकर कपड़े चेंज किए ।।

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दोस्त की बहन के साथ कामलीला

हैल्लो फ्रेंड्स में रजत  एक बार फिर से आप सभी के सामने एक और सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ। दोस्तों यह मेरी इस साईट पर दूसरी कहानी है.. लेकिन जो लोग मुझे नहीं जानते उन्हें में थोड़ा अपना परिचय करा दूँ। दोस्तों में पंजाब का रहने वाला हूँ और अपना खुद का एक बिजनेस करता हूँ। मेरी उम्र 25 साल है और कलर साफ, एक बड़ा, मोटा लंड। यह स्टोरी मेरे फ्रेंड की बहन के साथ मेरे अफेयर की है.. कि कैसे मैंने उसे अपना बनाया और यह बात तभी की है जब में और मेरा फ्रेंड दोनों एक साथ ही एक कॉलेज में थे। कॉलेज घर से थोड़ा दूर होने के कारण में एक हॉस्टल में रहता था.. वहाँ पर एक लड़का आशीष मेरा रूम मेट बन गया और हम दोनों बहुत अच्छे फ्रेंड बन गये थे और उसके माता, पिता भी मुझे बहुत अच्छी तरह से जानते थे और उसकी बहन सुरभि जो कि मुझसे दो साल बड़ी थी.. वो भी एक डेंटल कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। वो हमेशा आशीष का हालचाल मेरे फोन पर बात करके मालूम कर लेती थी और कई बार तो उसके बारे में पूछने के लिए वो हॉस्टल में आ जाती थी.. कि वो ठीक तरह से पढ़ाई करता है या कॉलेज जाता है कि नहीं और हम भी फोन करते रहते थे और में भी उसे कई बार मैसेज भेजता था।

तो एक बार जब हमारी छुट्टियाँ लगने वाली थी तो मेरे फ्रेंड ने कहा कि इस बार तू मेरे साथ मेरे घर चलेगा और मेरे घर पर फोन करके उसने बोल दिया और फिर हम दोनों उसके घर चले गये और जब में वहाँ पर गया तो वहाँ पर सुरभि भी थी वो एक सप्ताह पहले से ही घर पर थी। फिर हम सभी ने बहुत बातें की और खाना खाकर सो गये और अगले दिन आंटी ने कहा कि रजत यहाँ पर हमारे पास आया है उसे कहीं पर घुमाकर लाओ। तो सुरभि बोली कि चलो फिर आज हम फिल्म देखने चलते है और फिर हम तीनों फिल्म देखने चले गये। जब हम थियेटर में फिल्म देख रहे थे कि तभी आशीष को उसकी गर्लफ्रेंड का फोन आ गया और उसने कहा कि उसे उससे मिलना है तो वो मुझे बोलकर चला गया। फिर में और सुरभि दोनों फिल्म देख रहे थे इतने में मुझे सुरभि ने कहा कि साईड में जो अंकल बैठे है वो उसे छू रहे है। तो मैंने उसे कहा कि तुम थोड़ा और मेरे पास आकर कर बैठ जाओ और अगर वो फिर से ऐसी हरकत करेगा तो में उसे बोलूँगा।

फिर वो मेरे और करीब आकर बैठ गई और मैंने अपना हाथ उसकी कुर्सी के पीछे रख दिया ताकि अगर अंकल फिर से कोई हरकत करे तो मुझे पता चल जाए। फिर वो मेरे साथ ऐसे बैठी थी कि जैसे मेरी गर्लफ्रेंड हो.. उसके बूब्स का साईज़ 36 है और वो मुझे महसूस हो रहे थे.. मेरा मन कर रहा था कि उसे यहीं पर ही चोद दूँ.. लेकिन डरता था कि कहीं वो गुस्सा ना हो जाए। फिर मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख दिया और एक दूसरे के पास आ गये मुझे उसकी साँसे महसूस हो रही थी और इतने में इंटरवेल हो गया तो मैंने उसे कहा कि तुम बैठो में कुछ खाने को लाता हूँ। तो वो बोली कि मुझे भी साथ में जाना है और हम दोनों बाहर जाकर खाने का समान लेकर आ गये.. हमने पॉपकॉर्न और बर्गर, कोल्ड्रींक ले ली और फिर फिल्म शुरू हो गई.. लेकिन इतना सामान हम से पकड़ा नहीं जा रहा था।

तो मैंने उसे कहा कि तुम कोल्ड्रींक पकड़ो और फिर उसने पॉपकॉर्न अपने पैरों पर रख दियेया.. अंधेरा होने के कारण एक दो बार मेरा हाथ उसके बूब्स को लग गया.. लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर में खुद ही जानबूझ कर बार बार हाथ लगाता गया और फिर थोड़ी देर के बाद सुरभि बोली कि क्या बात है रजत.. पॉपकॉर्न ज्यादा ही अच्छे लगते है और हंसने लगी। तो मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए बोल दिया कि क्या करूं है ही इतने टेस्टी और एक हाथ पीछे ले जाकर उसे धीरे से हग कर लिया तो उसकी साँसे तेज़ हो गई और इससे पहले कि वो अपने होश में आती मैंने उसे किस कर दिया और हग कर लिया। फिर वो भी कुछ ना बोल पाई और मैंने उसे 5-7 मिनट किस करने के बाद उसके टॉप में हाथ डाल दिया और उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। उसके बूब्स बड़े ही मुलायम थे। फिर में और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और उसके मेरे और करीब आते ही मैंने उसके बूब्स को ब्रा से बाहर निकाला और निप्पल को अपनी ऊँगली में लेकर मसलने लगा।

फिर उसकी हालत अब बहुत खराब हो रही थी और वो आहह उफफफफफफफ्फ़ ह्म्‍म्म्मउउंम कर रही थी। फिर मैंने उसकी जीन्स का बटन खोला और अपना हाथ बीच में ले जाते हुए उसकी चूत पर ले गया और मैंने देखा कि उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और में उसकी चूत पर अपनी उंगली घुमाने लगा और उसकी चूत के दाने को ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगा.. इस बीच उसने मेरे गालों को, मेरे कान पर, होठो पर बहुत ज़ोर से काटा कि खून आने लगा और अपना हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर नाख़ून मारने लगी.. उसके नाख़ून के निशान आज भी मेरी कमर पर मौजूद है। फिर में उसकी चूत में उंगली डालकर चोदने लगा उसकी चूत बहुत टाईट थी और बहुत मुश्किल से मेरी बीच की ऊँगली अंदर जा रही थी और फिर हम फिल्म देखकर घर वापस आ गये। तो आंटी ने पूछा कि आशीष कहाँ पर है तो हमने बोल दिया कि वो अभी कहीं पर अपने एक फ्रेंड से मिलने गया है।

फिर शाम को में और आशीष 2-3 जगह पर घूमने गये और रात को खाना खाने के बाद अपने रूम में चले गये। तो सुरभि वहाँ पर आ गई और कहने लगी कि वो बोर हो रही है तो थोड़ा टाईम यहाँ पर बातें करने आ गई। फिर हम ऐसे ही गप्पे मारने लगे और फिर थोड़ी ही देर बाद आशीष वॉशरूम गया तो सुरभि ने कहा कि तुम आशीष के सोने के बाद ठीक दो बजे रात को मेरे रूम में आ जाना। तो मैंने बोला कि.. लेकिन कैसे? तो वो कुछ बोलने लगी इतने में आशीष आ गया और हम इधर उधर की बातें करने लगे। फिर आशीष बोला कि दीदी अब आप जाओ मुझे सोना है और वैसे भी 11:40 हो गये है और वो चली गई। फिर मुझे यह भी डर लग रहा था कि कहीं आशीष या उसके माता, पिता ना उठ जाये.. लेकिन उसे चोदने का मेरा सपना भी मुझे गरम कर रहा था.. लेकिन टाईम है कि निकल ही नहीं रहा था और बहुत देर यूँ ही इंतजार करने के बाद में 1:25 बजे उठ गया मुझसे और इंतजार नहीं हो रहा था।

तो में सुरभि के रूम में गया तो वो सो रही थी और उसने परफ्यूम लगा रखा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे वो नहाकर सोई हो.. में उसके पास गया और उसे पीछे से हग कर लिया और मैंने अपना लोवर उतार दिया अब मेरा लंड ठीक उसकी गांड के ऊपर था और में उसके बूब्स को दबा रहा था। फिर जब में उसके गर्दन पर किस कर रहा था तो वो उठ गई और मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराई। फिर मैंने जल्दी से उसकी शर्ट उतारी और वो अब पेंटी और सिर्फ़ ब्रा में थी। क्या बताऊँ यारों मुझे ऐसा लग रहा था कि इतनी सेक्सी लड़की मुझे पूरी ज़िंदगी में नहीं मिल सकती और में उसके ऊपर लेट गया और उसके पैर खोलकर अपने लंड को उसकी पेंटी पर रगड़ने लगा और वो मेरे लंड को देखकर बोली कि तुम तो पहले से ही अनुभवी हो और मुझे किस करने लगी। फिर मैंने उसके बूब्स को ब्रा से आज़ाद किया और उन्हें पागलो की तरह चूसने लगा और में इतने ज़ोर से चूस रहा था कि उसके निप्पल एकदम कड़क हो गये थे और बूब्स भी।

फिर में उसकी पेंटी पर अपनी उंगलियां घुमाने लगा और उसे चूमने लगा और फिर उसके पैर जो कि बिल्कुल साफ थे में उन्हें चूमते चूमते उसकी जांघो पर आ गया और फिर अपनी जीभ से उसकी पेंटी के ऊपर से चाटने लगा और फिर वो झड़ गई और मैंने उसकी पेंटी उतारी और उसके हाथ में अपना लंड दे दिया वो जैसे जैसे में उसे बता रहा था वो उसे वैसे वैसे हिला रही थी। फिर मैंने उसकी चूत को करीब 15 मिनट तक चाटा और फिर अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और धक्का देने लगा। उसकी चूत से थोड़ा खून निकल रहा था.. लेकिन वो थोड़ा भी नहीं चिल्लाई.. क्योंकि मैंने एक तकिया उसके मुहं पर रख दिया था। फिर 5 मिनट ऐसा करने के बाद में अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल पाया और फिर उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी अपनी गांड को हिला हिलकर मेरे लंड का मजा ले रही थी। मैंने उसे 4-5 नये नये तरीको से चोदा। फिर में अपने रूम में आ गया ।।

पति की गर्लफ्रेंड मेरी सौतन

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम मानसी है और आज में आप लोगों के साथ अपनी पहली स्टोरी शेयर करना चाहती हूँ। दोस्तों.. यह मेरी लाईफ की एक सच्ची कहानी है। में उड़ीसा की रहने वाली हूँ। हम भुवनेश्वर में रहते है। मेरे पापा सिविल कांट्रेक्टर है। मेरे परिवार में मेरी माँ, मेरे पापा, मेरी एक छोटी बहन और में हम 4 लोग है। मेरी शादी आज से दो साल पहले 22 मई 2013 को सुनील नाम के एक लड़के के साथ हुई.. जो कि मुंबई में एक बहुत बड़ी कम्पनी में सेल्स मेनेजर की पोस्ट पर काम करते है। शादी के बाद में मेरे पति के साथ मुंबई में शिफ्ट हो गई.. मुंबई में उनको कंपनी की तरफ से एक क्वॉर्टर मिला हुआ था और फिर ऐसे ही हमारी शादीशुदा जिंदगी कुछ महीनों तक बहुत मज़े से चलती रही।

वो मुझे बहुत प्यार करते थे और में भी उनके साथ बहुत खुश थी और हमारी सेक्सुअल लाईफ भी बहुत मजेदार थी और में उनसे संतुष्ट थी। वो जब भी मुझे सेक्स करने के लिए कहते थे में तुरंत राज़ी हो जाती थी और ऐसे ही हमारी जिन्दगी के करीब दो साल गुजर गए.. हमे पता भी नहीं चला। फिर दोस्तों में एक दिन जब घर की साफ सफाई कर रही थी.. तो मुझे एक मेमोरी कार्ड मिला और उसको जब मैंने लॅपटॉप में डालकर देखा तो मेरे होश ही उड़ गए.. क्योंकि उसमें कुछ ऐसे वीडियो थे जो में कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती। फिर मैंने एक एक विडियो को खोलकर देखा.. उसमे एक लड़की करीब 22-24 साल की होगी जो मेरे पति को किस कर रही थी और मेरे हिसाब से उसका फिगर 30-32-34 होगा और वो किसी होटल का रूम था क्योंकि मुझे उसके अंदर की सजावट से ऐसा लगा और फिर बारी बारी से वो दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे। फिर सुनील ने उसके टॉप और जींस को उतार दिया और वो लड़की अपने एक हाथ को सुनील की पेंट में डालकर उसके लंड को सहला रही थी।

फिर सुनील ने उसको पूरी नंगी कर दिया और उसके बूब्स को मसलने लगा और फिर उसे नीचे लेटा दिया और उसकी चूत में अपनी जीभ को डालकर उसकी चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद वो लड़की भी सुनील के लंड को पकड़ कर अपने मुहं में डालकर चूसने लगी और फिर कुछ टाईम ऐसे ही चलता रहा। तभी थोड़ी देर के बाद वो दोनों शांत होने लगे शायद वो दोनों अब झड़ गए थे और वो वीडियो भी खत्म हो गई। फिर मैंने वो सभी वीडियो देखे.. जिनमे सब कुछ एक जैसा ही था। सुनील ने उसमें उस लड़की को कई बार चोदा और उसकी गांड भी मारी। तो मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और में बहुत गरम भी हो गई थी। फिर शाम को जब सुनील ऑफिस से घर आया तो मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया और रात को 10 बजे हम लोगों ने एक साथ में खाना खाया और सोने के लिए अपने बेडरूम में चले गए। फिर बेड पर लेटने के बाद मैंने सुनील से बोला कि सुनील क्या में जो कहूँगी वो तुम करोगे? तो सुनील ने बोला कि हाँ तुम जो भी कहोगी में वो करूँगा। तो में बोली कि तुम मेरी चूत को चाटो तो वो थोड़ा हैरान होकर मुझे देखने लगा और अब मुझे पता था कि वो मेरी चूत को नहीं चाटेगा.. क्योंकि मैंने बहुत बार उसका लंड चूसने के लिए कहा..

लेकिन वो हर बार यह गंदा है कहकर मुझे लंड को चूसने नहीं देता था। तो सुनील बोला कि क्या तुम पागल हो गई हो और वो ऐसा कहकर मुझे डांटने लगा। में तो पहले से ही बहुत गुस्से में थी तो मैंने लॅपटॉप को चालू करके वो विडियो शुरू कर दिया तो वो यह सब देखकर तो वो पसीने पसीने हो गया और फिर वो मुझसे नज़रे चुराने लगा और मुझे बोला कि मनु प्लीज मुझे माफ़ कर दो में ऐसा फिर कभी नहीं करूँगा तुम जो भी बोलोगी में वो सब करूँगा.. लेकिन प्लीज किसी को कुछ मत बताना। फिर में थोड़ी शांत हो गई और बोली कि वो लड़की कौन है? तो वो मुझे बोला कि वो मेरी मौसी की लड़की है.. वो मुंबई में एक होस्टल में रहती है और यह विडियो हमारी शादी से पहले का है और उस टाईम हम दोनों का अफेयर चल रहा था और में उससे शादी भी कर चुका हूँ.. लेकिन अपने घर वालों के डर से मैंने कभी किसी को कुछ भी नहीं बताया। तो में बोली कि अभी भी क्या तुम उसे चोदते हो? तो सुनील बोला कि हाँ में कभी कभी ऑफिस टूर के बहाने जब रात को घर नहीं आता हूँ.. तब में उसके साथ होता हूँ और पूरी रात उसकी चुदाई करता हूँ।

तभी यह बात सुनकर में बहुत गुस्से से उसको डांटने लगी तो वो गिड़गिड़ाते हुए रोने लगा। फिर मुझे लगा कि में अपने पति के साथ ऐसा नहीं कर सकती हूँ अगर उनको उसके साथ थोड़ी बहुत ख़ुशी मिलती है तो में भी उनकी इस ख़ुशी में शामिल हो जाऊँ तो इससे हम सबका भला होगा। तो मैंने उससे पूछा कि उसका नाम क्या है? तो सुनील ने बोला कि उसका नाम पल्लवी है। फिर मैंने बोला कि उसको अभी के अभी फोन लगाओ और उसके साथ सेक्सी बातें करो.. तो सुनील ने पल्लवी को फोन लगाया।

सुनील : हैल्लो पल्लवी।

पल्लवी : हाय जानू कैसे हो? और इतनी रात गये मुझे कैसे याद किया क्या भाभी घर पर नहीं है?

सुनील : नहीं यार तुम्हारी भाभी को तुम्हारे बारे में सब कुछ पता चल गया है।

पल्लवी : क्या? फिर तो में मर गई।

सुनील : अरे तुम्हे कुछ नहीं होगा डरो मत.. तुम्हारी भाभी ने मुझे बोला कि उसको फोन करो तो इसलिए मैंने अभी तुम्हे कॉल किया।

में : हैल्लो पल्लवी कैसी हो?

पल्लवी : भाभी नमस्ते।

में : क्यों पल्लवी मेरी पीठ पीछे यह सब क्या चल रहा है?

पल्लवी : मुझे माफ़ करना भाभी.. लेकिन में सुनील भैया से बहुत प्यार करती हूँ और मैंने तो उनसे शादी भी कर ली है.. लेकिन आपके डर की वजह से में कभी आपके सामने नहीं आ पाती हूँ।

में : क्या तुम सच्चे दिल से सुनील को प्यार करती हो?

पल्लवी : हाँ अगर वो कहे तो में तो उनके लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ।

में : तो पल्लवी तुम अभी एक काम करो अपना समान पेक करो और सुनील तुम्हे लेने आ रहा है। तुम अब हमारे साथ यहाँ पर रहोगी और अगर तुम्हे कोई प्राब्लम है तो बताओ?

पल्लवी : क्या सच भाभी? में आपकी बहुत आभारी रहूंगी और भाभी आप जो कहोगी में वो सब करूँगी आपकी नौकरानी बनकर रहूंगी.. प्लीज आप मुझे सुनील से अलग मत करना।

में : अरे नहीं.. वो मेरे पति है और जब तुमने भी उनसे शादी की है तो वो तुम्हारे भी पति हुए तो हम दोनों एक पति की पत्नी बनकर रहेंगे ठीक है.. तुम तैयार हो जाओ में उनको तुम्हें लेने के लिए भेजती हूँ.. बाय बाय।

फिर एक घंटे के बाद सुनील पल्लवी को साथ में लेकर घर पर आ गया और मैंने पल्लवी का आरती की थाली लेकर स्वागत किया और बोला कि आज से हम दोनों एक दूसरे की सौतन हुई.. लेकिन हम दोनों दो बहनों की तरह सुनील की सेवा करेंगी और वो हम दोनों का साथ देगा क्यों ठीक है? फिर मैंने पल्लवी को बोला कि तुम बाथरूम में जाओ और नाहकर आ जाओ आज तुम्हारी सुहागरात है और इससे पहले तो तुम बहुत बार अपनी सुहागरात मना चुकी हो.. लेकिन तुम्हारी असली सुहागरात आज ही है।

फिर मैंने उन दोनों के लिए सुहागरात की सेज तैयार की और फिर वो जब नहाकर बाहर निकली तो मैंने उसे शादी का लाल जोड़ा पहनने के लिए दिया और उसे दुल्हन की तरह तैयार किया और सुनील को बोला कि तुम अब उसकी माँग भरो और मंगलसूत्र पहनाओ। तो सुनील ने उसकी माँग में सिंदूर भरा और मंगलसूत्र पहना दिया। पल्लवी ने सुनील के और मेरे पैर छुए और हम दोनों से आशिर्वाद लिया। तभी पल्लवी ने बोला कि भाभी आप भी तैयार हो जाओ ना आज हम सब मिलकर सुहागरात मनाएँगे। तो मैंने बोला कि पागल आज तू मना हम सब कल से एक ही रूम में एक ही बेड पर सोएंगे और आज में गेस्ट रूम में जाकर सोती हूँ। तो में सोने के लिए चली गई और में बाहर से तो बहुत खुश नजर आ रही थी.. लेकिन अंदर से बहुत दुखी थी। मेरे मन में यही बात खाए जा रही थी कि आज से मेरे पति का प्यार आधा हो जाएगा और ऐसे ही सोचते सोचते मुझे पता ही नहीं चला कब मुझे नींद आ गई और में सो गई।

फिर सुबह जब में सुनील को चाय देने के लिए उसके कमरे में गई तो मैंने देखा कि वो दोनों पूरे नंगे होकर एक दूसरे से लिपट कर सोए हुए है और सुनील का लंड अभी तक पल्लवी की चूत के अंदर ही था और एक हाथ उसके बूब्स पर। तो मैंने दोनों को उठाया और चाय दी और हम सबने मिलकर चाय पी और पल्लवी नहाने चली गई। जब पल्लवी नहाने गई तो सुनील ने मुझसे पूछा कि क्या तुमने हम दोनों को माफ़ कर दिया है? तो मैंने बोला कि अगर मैंने माफ़ नहीं किया होता तो में पल्लवी को यहाँ पर नहीं बुलाती और तुम दोनों को अकेला चुदाई करने के लिए नहीं छोड़ती। तभी यह बात सुनकर सुनील ने खुश होकर मुझे गले लगाया और मुझे किस करने लगा। तो मैंने बोला कि आज से आपकी दो बीवियां है और आपको हम दोनों को खुश करना पड़ेगा। तो सुनील नाहकर ऑफिस चला गया। हम दोनों बैठकर बातें करने लगीं और प्लान करने लगी कि कैसे लाईफ को एन्जॉय किया जाए? और जब रात को सुनील ऑफिस से वापस घर आया तो हम दोनों उससे लिपटकर किस करने लगी। वो बहुत खुश होकर हम दोनों को बारी बारी किस करने लगा।

फिर हम सभी ने खाना खाया और सोने के लिए बेडरूम में आए.. मैंने और पल्लवी ने पारदर्शी गाऊन पहन लिया जो कि मुश्किल से कमर से थोड़ा नीचे था और हमारा बाकी जिस्म नंगा था और हम दोनों ने अंदर कुछ भी नहीं पहना था। फिर जब सुनील रूम के अंदर आया तो हम दोनों को इस तरह से देखकर बहुत खुश हो गया और में सुनील का एक हाथ पकड़ कर उसे चूमने लगी। तभी पल्लवी ने अचानक से उसका बरमूडा पकड़ा और खींचकर उसको नंगा कर दिया और उसके लंड को मुहं में लेकर चूसने लगी। तो सुनील ने अपनी एक ऊँगली मेरी चूत के अंदर डाली और ऊँगली करने लगा.. तभी उसने अपने हाथ की स्पीड बढ़ा दी और मुझे ज़ोर ज़ोर से ऊँगली करने लगा और फिर करीब 10 मिनट के बाद मेरी चूत से गरम पानी की नदी बहने लगी और मेरी चूत से निकला हुआ लावा जांघो से होता हुआ बेड पर गिरने लगा।

तभी सुनील बारी बारी से हम दोनों की चूत को फैलाकर अपनी जीभ से कुत्ते की तरह चाटने लगा और हमारा सारा रस पीने लगा और कहने लगा कि बीवी हो तो ऐसी। तो में सुनील का लंड मुहं में लेकर चूसने लगी तभी सुनील ज़ोर ज़ोर से मेरे मुहं में धक्के देने लगा और थोड़ी देर के बाद सुनील का सारा रस मेरे मुहं के अंदर चला गया। दोस्तों.. आज से पहले कभी भी मैंने उसके लंड को मुहं में नहीं लिया था और ना ही टेस्ट किया था.. लेकिन मुझे उसके लंड के रस का एक अजीब सा स्वाद मिला और फिर मैंने सारा रस पी लिया और हम दोनों बारी बारी उसका लंड चूसने लगे। फिर सुनील हम दोनों को लेटाकर चोदने लगा.. कभी मेरी चूत में तो कभी पल्लवी की चूत में अपना लंड डालने लगा और यह सब करते हुए हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। उस रात हम लोगों ने 5 बार चुदाई करवाई।

दोस्तों.. में अपनी लाईफ में अपने दिन कैसे गुजार रही हूँ? और सुनील हम दोनों को किस तरह चोद रहा है? हम दोनों अपनी चुदाई से कितने खुश है? यह सब में आप सभी को अपनी अगली स्टोरी में बताउंगी ।।

अनु आंटी के साथ छत पर सेक्स का मज़ा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम महेश है और में महाराष्ट्र से हूँ। यहाँ बारिश बहुत अच्छी होती है और बहुत मज़ा भी आता है। मुझे बारिश में घूमना बाईक को तेज़ चलाना अच्छा लगता है। मेरी उम्र 28 साल है और अभी तक मेरी शादी नहीं हुई है। ये कहानी बिल्कुल सच्ची है और ये मेरी और मेरे घर के सामने रहने वाली आंटी के बारे में है। अब में आपको ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ। पिछले महीने में और आंटी पूना गये थे, उनको हॉस्पिटल में चेकअप करवाना था तो में भी उनके साथ गया था। हम रेल्वे स्टेशन पर लेट गये और हमारी ट्रेन मिस हो गयी। फिर आंटी ने मुझसे कहा कि हम बस से चलते है, बस स्टेण्ड रेल्वे स्टेशन से बस थोड़ा ही दूर है तो में और आंटी बस के लिए चल पड़े और जब दोपहर के 1 बज रहे थे।

फिर हमको बस तो मिली लेकिन बस में भीड़ ज्यादा थी। फिर आंटी को एक सीट मिली तो वो वहाँ पर बैठ गयी, अब में उनके साथ खड़ा था। उस समय आंटी ने सलवार कुर्ता पहना हुआ था और वो भी ब्लू कलर का। अब में उनसे चिपककर खड़ा था। अब आंटी मुझसे चिपककर बात कर रही थी और सब आंटी को देख रहे थे और देखेंगे भी क्यों नहीं? वो इतनी कमाल की जो लग रही थी। वैसे आंटी की उम्र 38 साल है, लेकिन मेकअप करने से वो 30 साल की लगती है और उनके बूब्स 36 साईज के है और वो ड्रेस के नीचे ब्रा नहीं पहनती तो उनके निप्पल ड्रेस से साफ दिखते थे। अब में तो उनके निप्पल को देखकर पागल हो गया था, अब बस अपनी रफ़्तार पर थी और में अपने काम में मस्त था।

फिर एक स्टॉप पर बस रुकी तो आंटी ने कहा कि उनको वॉशरूम जाना है। फिर में उनके साथ नीचे उतरा और फिर आंटी वॉशरूम में गयी। अब में पीछे से उसकी गांड देख रहा था और अब मेरा लंड उसी वक़्त हरकत में आ गया था। फिर आंटी वॉशरूम से जैसे ही बाहर आई तो उन्होंने मेरी हालत देखकर एक सेक्सी स्माईल पास की और मेरा हाथ पकड़कर बस में ले गयी। फिर आंटी बोली थोड़ी देर तू बैठ जा में खड़ी रहती हूँ। फिर मैंने कहा ठीक है। अरे यार में उनका नाम लिखना भूल गया, उनका नाम अनिता है और आंटी मेरे बाजू में चिपककर खड़ी थी। फिर कुछ देर के बाद आंटी ने अपना एक पैर मेरे पैर से लगा दिया और हिलाने लगी। फिर ऐसा करते-करते हम पूना आ गये। फिर हम बस से उतरे और हॉस्पिटल की तरफ चल दिए तो डॉक्टर वहाँ पर आए हुए थे तो आंटी का काम जल्दी हो गया। फिर हम वहाँ से निकले, लेकिन ट्रेन को आने में टाईम था। फिर आंटी बोली कि अब क्या करे? फिर मैंने आंटी से कहा कि क्यों ना शनिवार वाडा देखने जाए? तो अब आंटी को मेरा प्लान अच्छा लगा।

फिर हम ऑटो से शनिवार वाडा गये जो कि पूना में बहुत मशहूर है, वहाँ ज्यादा भीड़ नहीं थी तो आंटी और में घूम रहे थे। अब नीचे घूमने के बाद हम ऊपर की तरफ गये, अब वहाँ हम दोनों के अलावा और कोई नहीं था। फिर मैंने मेरा मोबाईल निकाला और आंटी की कुछ फोटो लेने लगा। अब फोटो क्लिक करते वक़्त आंटी का दुपट्टा नीचे गिर गया तो आंटी ने उसे उठाने के लिए जैसे ही हाथ नीचे किया तो मुझे उनके रस से भरे बूब्स दिखाई दिए। फिर आंटी ने दुपट्टा उठाते वक़्त एक नज़र मेरी तरफ देखा तो में उनके बूब्स को देख रहा था तो आंटी सिर्फ़ इतना बोली कि अच्छा लगा, लेकिन में तो अब उनके बूब्स में खोया हुआ था और मेरा लंड बहुत ज्यादा टाईट हो गया था। फिर में और आंटी एक जगह बैठ गये और नॉर्मल बातें कर रहे थे कि आंटी ने मुझसे कहा कि तुम मुझमें क्या देख रहे थे? तो अब में क्या बोलता? फिर मैंने सीधा बोल दिया कि में आपके बूब्स देख रहा था, जिसने मुझे सुबह से पागल बना दिया है तो आंटी हंसने लगी और बोली तो हाथ भी लगाकर देखना।

फिर मैंने मेरी नज़रे यहाँ वहाँ घूमाकर देखा तो ऊपर हम दोनों के अलावा कोई नहीं था। फिर में आंटी के करीब गया तो आंटी ने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझे अपनी तरफ ज़ोर से खींचा। फिर में बोला कि आंटी क्या कर रही हो? फिर आंटी बोली सिर्फ़ मुझे अनु बोल महेश और मुझे आज मत रोक में बहुत प्यासी हूँ। अब में आंटी के लिप पर किस करने लगा। अब हम एक दूसरे के लिप के साथ खेल रहे थे, तभी हमें किसी के ऊपर आने की आवाज़ आई तो हम दोनों अलग हो गये, लेकिन अब आंटी तो गर्म हो चुकी थी तो आंटी ने कहा कि महेश अब में और नहीं रूक सकती हूँ, मेरी चूत में पानी आ रहा है। फिर मैंने कहा कि अनु आग तो मेरे लंड में भी लगी है तुम्हारी चूत में कब डालूं? फिर अनु और में गंदी बातें करते करते रेल्वे स्टेशन पर आ गये। और फिर आंटी ने कहा कि महेश तुम इतनी अच्छी गंदी बातें कैसे करते हो? मेरा तो पानी निकला जा रहा है। फिर मैंने कहा कि आंटी थोड़ा और रोक कर रखो। फिर देखो कितना मज़ा आता है, उतने में एक फास्ट ट्रेन आई तो हम दोनों उसमें चढ़ गये और बैठ गये, क्योंकि उस ट्रेन में लोनवला के भी कुछ लोग थे।

अनु आंटी के साथ छत पर सेक्स का मज़ा भाग २

फिर हम शाम को 9 बजे लोनवला पहुँच गये थे और फिर हम एक ऑटो करके घर आ गये तो आंटी ने कहा कि आज रात को 10 बजे ऊपर छत पर मिलना। पहले में घर जाकर फ्रेश हो गया और मेडिकल की शॉप से कंडोम और एक वियाग्रा की गोली लेकर आया। अब में घर पर खाना खाकर 10 बजने का इन्तजार कर रहा था, तभी मेरे मोबाईल पर आंटी का मैसेज आया कि ऊपर आ जा। फिर में छत की तरफ गया तो आंटी वहाँ खड़ी थी तो वहाँ बहुत अंधेरा था और कोई हम दोनों को देख भी नहीं सकता था और बारिश भी बहुत तेज़ आ रही थी और हमारी छत ऊपर से और चारो तरफ से बंद है। फिर मैंने आंटी को एक टाईट हग दिया तो अब आंटी के बूब्स मेरे सीने में चुभने लगे, अब आंटी मदहोश हो रही थी।

अब उनके बदन से परफ्यूम की मादक महक आ रही थी और अब में बेकाबू हो गया और उनके लिप पर एक गहरा किस किया। उस वक़्त आंटी ने साड़ी पहनी थी और ब्रा भी पहनी थी। फिर मैंने उनका पल्लू नीचे गिरा दिया और उनके ब्लाउज के दो बटन खोल दिए, अनु के बूब्स कमाल लग रहे थे, लेकिन अंधेरा था तो मुझे कुछ साफ़ नहीं दिख रहा था। फिर मैंने अपने मोबाईल को चालू किया और उसकी रोशनी से अनु के बूब्स देखने लगा। फिर मैंने उसके एक बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से अपने मुँह में भर लिया और काट लिया तो अनु ज़ोर से चीखी और बोली कि धीरे करो महेश, अब में ज्यादा देर तक रुक नहीं सकता था और मेरा लंड वियाग्रा की गोली के कारण बहुत टाईट हो गया था, जो अब अनु को साड़ी के ऊपर से उसकी चूत में लग रहा था। अब अनु ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और बोली कि महेश तेरा लंड कितना कड़क है बिल्कुल लोहे की राड़ की तरह है। फिर मैंने कहा कि अनु ये तुम्हारी चूत के लिए एकदम फिट है।

फिर अनु बोली कि फिर देर क्यों लगाता है? लग जा अपने काम पर तो फिर मैंने अनु की साड़ी को ऊपर करके उसे डॉगी स्टाईल में किया और अपनी जेब से कंडोम बाहर निकालकर अनु के हाथ में दे दिया। फिर अनु उठी और मेरे लंड पर कंडोम लगाकर फिर से डॉगी स्टाईल में हो गयी। अब अनु की गांड बहुत मस्त लग रही थी। फिर ना जाने कैसे मैंने अनु की गांड पर एक किस किया और अपना लंड पीछे से अनु की चूत में डालने लगा। अब अनु आहह कर रही थी और अब मेरा लंड धीरे-धीरे उसकी चूत में अंदर जा रहा था, जब मेरा लंड अनु की चूत में आसानी से जाने लगा तो मैंने अपनी स्पीड तेज़ की और ज़ोर-ज़ोर से लंड अंदर बाहर करने लगा। अब अनु तो बस आहहाअ हम्म ऊहह करे जा रही थी। फिर में उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही मसल रहा था और अनु भी अपनी गांड को आगे से पीछे मेरे लंड पर मार रही थी, अब 20 मिनट से में उसे चोद रहा था तो अब अनु ने एक बार अपना पानी छोड़ दिया था, लेकिन मेरा वियाग्रा गोली के कारण नहीं निकल रहा था।

अब अनु भी मस्ती में आकर मेरे लंड के साथ-साथ अपनी एक उंगली चूत में डालकर मज़ा ले रही थी और फिर 30 मिनट के बाद मेरे लंड में से पानी आने लगा। फिर मैंने अनु से कहा कि लंड का पानी कंडोम में गिरा दूँ या तुम्हारे बूब्स पर। फिर अनु बोली कि बूब्स पर गिरा दे। फिर मैंने भी कंडोम निकाला और लंड अनु के हाथ में दिया। अब वो मेरे लंड को आगे पीछे कर रही थी। फिर थोड़ी देर में मेरे लंड ने पानी निकाल दिया, जो सीधा जाकर अनु के चेहरे पर गिरा और बहुत सारा पानी अनु के चेहरे पर था। फिर अनु ने उसे अपने हाथ से साफ किया और ब्लाउज को थोड़ा निकालकर बूब्स पर मलने लग गयी। फिर हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठे रहे। मेरा लंड अभी भी टाईट था, लेकिन अब अनु की चूत में दर्द हो रहा था तो अनु बोली कि में फिर से अपने मुँह से तुम्हारा पानी निकाल देती हूँ। अब मुझे और क्या चाहिए था? फिर 15 मिनट के बाद मेरे लंड ने फिर से अनु के मुँह में पानी छोड़ दिया।

फिर हम नीचे आए तो अनु ने मुझे एक बड़ा वाला लिप किस दिया और वो अपने घर चली गयी और में अपने घर आ गया। फिर मुझे उसका मैसेज आया कि महेश तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है आई लव यू। फिर मैंने भी उसे रिप्लाई दिया कि तुम्हारी चूत भी बहुत मस्त है और गांड भी मस्त है। फिर हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते और खूब मजे करते है ।।

धन्यवाद …

पति की गर्लफ्रेंड मेरी सौतन

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम मानसी है और आज में आप लोगों के साथ अपनी पहली स्टोरी शेयर करना चाहती हूँ। दोस्तों.. यह मेरी लाईफ की एक सच्ची कहानी है। में उड़ीसा की रहने वाली हूँ। हम भुवनेश्वर में रहते है। मेरे पापा सिविल कांट्रेक्टर है। मेरे परिवार में मेरी माँ, मेरे पापा, मेरी एक छोटी बहन और में हम 4 लोग है। मेरी शादी आज से दो साल पहले 22 मई 2013 को सुनील नाम के एक लड़के के साथ हुई.. जो कि मुंबई में एक बहुत बड़ी कम्पनी में सेल्स मेनेजर की पोस्ट पर काम करते है। शादी के बाद में मेरे पति के साथ मुंबई में शिफ्ट हो गई.. मुंबई में उनको कंपनी की तरफ से एक क्वॉर्टर मिला हुआ था और फिर ऐसे ही हमारी शादीशुदा जिंदगी कुछ महीनों तक बहुत मज़े से चलती रही।

वो मुझे बहुत प्यार करते थे और में भी उनके साथ बहुत खुश थी और हमारी सेक्सुअल लाईफ भी बहुत मजेदार थी और में उनसे संतुष्ट थी। वो जब भी मुझे सेक्स करने के लिए कहते थे में तुरंत राज़ी हो जाती थी और ऐसे ही हमारी जिन्दगी के करीब दो साल गुजर गए.. हमे पता भी नहीं चला। फिर दोस्तों में एक दिन जब घर की साफ सफाई कर रही थी.. तो मुझे एक मेमोरी कार्ड मिला और उसको जब मैंने लॅपटॉप में डालकर देखा तो मेरे होश ही उड़ गए.. क्योंकि उसमें कुछ ऐसे वीडियो थे जो में कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती। फिर मैंने एक एक विडियो को खोलकर देखा.. उसमे एक लड़की करीब 22-24 साल की होगी जो मेरे पति को किस कर रही थी और मेरे हिसाब से उसका फिगर 30-32-34 होगा और वो किसी होटल का रूम था क्योंकि मुझे उसके अंदर की सजावट से ऐसा लगा और फिर बारी बारी से वो दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे। फिर सुनील ने उसके टॉप और जींस को उतार दिया और वो लड़की अपने एक हाथ को सुनील की पेंट में डालकर उसके लंड को सहला रही थी।

फिर सुनील ने उसको पूरी नंगी कर दिया और उसके बूब्स को मसलने लगा और फिर उसे नीचे लेटा दिया और उसकी चूत में अपनी जीभ को डालकर उसकी चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद वो लड़की भी सुनील के लंड को पकड़ कर अपने मुहं में डालकर चूसने लगी और फिर कुछ टाईम ऐसे ही चलता रहा। तभी थोड़ी देर के बाद वो दोनों शांत होने लगे शायद वो दोनों अब झड़ गए थे और वो वीडियो भी खत्म हो गई। फिर मैंने वो सभी वीडियो देखे.. जिनमे सब कुछ एक जैसा ही था। सुनील ने उसमें उस लड़की को कई बार चोदा और उसकी गांड भी मारी। तो मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और में बहुत गरम भी हो गई थी। फिर शाम को जब सुनील ऑफिस से घर आया तो मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया और रात को 10 बजे हम लोगों ने एक साथ में खाना खाया और सोने के लिए अपने बेडरूम में चले गए। फिर बेड पर लेटने के बाद मैंने सुनील से बोला कि सुनील क्या में जो कहूँगी वो तुम करोगे? तो सुनील ने बोला कि हाँ तुम जो भी कहोगी में वो करूँगा। तो में बोली कि तुम मेरी चूत को चाटो तो वो थोड़ा हैरान होकर मुझे देखने लगा और अब मुझे पता था कि वो मेरी चूत को नहीं चाटेगा.. क्योंकि मैंने बहुत बार उसका लंड चूसने के लिए कहा..

लेकिन वो हर बार यह गंदा है कहकर मुझे लंड को चूसने नहीं देता था। तो सुनील बोला कि क्या तुम पागल हो गई हो और वो ऐसा कहकर मुझे डांटने लगा। में तो पहले से ही बहुत गुस्से में थी तो मैंने लॅपटॉप को चालू करके वो विडियो शुरू कर दिया तो वो यह सब देखकर तो वो पसीने पसीने हो गया और फिर वो मुझसे नज़रे चुराने लगा और मुझे बोला कि मनु प्लीज मुझे माफ़ कर दो में ऐसा फिर कभी नहीं करूँगा तुम जो भी बोलोगी में वो सब करूँगा.. लेकिन प्लीज किसी को कुछ मत बताना। फिर में थोड़ी शांत हो गई और बोली कि वो लड़की कौन है? तो वो मुझे बोला कि वो मेरी मौसी की लड़की है.. वो मुंबई में एक होस्टल में रहती है और यह विडियो हमारी शादी से पहले का है और उस टाईम हम दोनों का अफेयर चल रहा था और में उससे शादी भी कर चुका हूँ.. लेकिन अपने घर वालों के डर से मैंने कभी किसी को कुछ भी नहीं बताया। तो में बोली कि अभी भी क्या तुम उसे चोदते हो? तो सुनील बोला कि हाँ में कभी कभी ऑफिस टूर के बहाने जब रात को घर नहीं आता हूँ.. तब में उसके साथ होता हूँ और पूरी रात उसकी चुदाई करता हूँ।

तभी यह बात सुनकर में बहुत गुस्से से उसको डांटने लगी तो वो गिड़गिड़ाते हुए रोने लगा। फिर मुझे लगा कि में अपने पति के साथ ऐसा नहीं कर सकती हूँ अगर उनको उसके साथ थोड़ी बहुत ख़ुशी मिलती है तो में भी उनकी इस ख़ुशी में शामिल हो जाऊँ तो इससे हम सबका भला होगा। तो मैंने उससे पूछा कि उसका नाम क्या है? तो सुनील ने बोला कि उसका नाम पल्लवी है। फिर मैंने बोला कि उसको अभी के अभी फोन लगाओ और उसके साथ सेक्सी बातें करो.. तो सुनील ने पल्लवी को फोन लगाया।

सुनील : हैल्लो पल्लवी।

पल्लवी : हाय जानू कैसे हो? और इतनी रात गये मुझे कैसे याद किया क्या भाभी घर पर नहीं है?

सुनील : नहीं यार तुम्हारी भाभी को तुम्हारे बारे में सब कुछ पता चल गया है।

पल्लवी : क्या? फिर तो में मर गई।

सुनील : अरे तुम्हे कुछ नहीं होगा डरो मत.. तुम्हारी भाभी ने मुझे बोला कि उसको फोन करो तो इसलिए मैंने अभी तुम्हे कॉल किया।

में : हैल्लो पल्लवी कैसी हो?

पल्लवी : भाभी नमस्ते।

में : क्यों पल्लवी मेरी पीठ पीछे यह सब क्या चल रहा है?

पल्लवी : मुझे माफ़ करना भाभी.. लेकिन में सुनील भैया से बहुत प्यार करती हूँ और मैंने तो उनसे शादी भी कर ली है.. लेकिन आपके डर की वजह से में कभी आपके सामने नहीं आ पाती हूँ।

में : क्या तुम सच्चे दिल से सुनील को प्यार करती हो?

पल्लवी : हाँ अगर वो कहे तो में तो उनके लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ।

में : तो पल्लवी तुम अभी एक काम करो अपना समान पेक करो और सुनील तुम्हे लेने आ रहा है। तुम अब हमारे साथ यहाँ पर रहोगी और अगर तुम्हे कोई प्राब्लम है तो बताओ?

पल्लवी : क्या सच भाभी? में आपकी बहुत आभारी रहूंगी और भाभी आप जो कहोगी में वो सब करूँगी आपकी नौकरानी बनकर रहूंगी.. प्लीज आप मुझे सुनील से अलग मत करना।

में : अरे नहीं.. वो मेरे पति है और जब तुमने भी उनसे शादी की है तो वो तुम्हारे भी पति हुए तो हम दोनों एक पति की पत्नी बनकर रहेंगे ठीक है.. तुम तैयार हो जाओ में उनको तुम्हें लेने के लिए भेजती हूँ.. बाय बाय।

फिर एक घंटे के बाद सुनील पल्लवी को साथ में लेकर घर पर आ गया और मैंने पल्लवी का आरती की थाली लेकर स्वागत किया और बोला कि आज से हम दोनों एक दूसरे की सौतन हुई.. लेकिन हम दोनों दो बहनों की तरह सुनील की सेवा करेंगी और वो हम दोनों का साथ देगा क्यों ठीक है? फिर मैंने पल्लवी को बोला कि तुम बाथरूम में जाओ और नाहकर आ जाओ आज तुम्हारी सुहागरात है और इससे पहले तो तुम बहुत बार अपनी सुहागरात मना चुकी हो.. लेकिन तुम्हारी असली सुहागरात आज ही है।

फिर मैंने उन दोनों के लिए सुहागरात की सेज तैयार की और फिर वो जब नहाकर बाहर निकली तो मैंने उसे शादी का लाल जोड़ा पहनने के लिए दिया और उसे दुल्हन की तरह तैयार किया और सुनील को बोला कि तुम अब उसकी माँग भरो और मंगलसूत्र पहनाओ। तो सुनील ने उसकी माँग में सिंदूर भरा और मंगलसूत्र पहना दिया। पल्लवी ने सुनील के और मेरे पैर छुए और हम दोनों से आशिर्वाद लिया। तभी पल्लवी ने बोला कि भाभी आप भी तैयार हो जाओ ना आज हम सब मिलकर सुहागरात मनाएँगे। तो मैंने बोला कि पागल आज तू मना हम सब कल से एक ही रूम में एक ही बेड पर सोएंगे और आज में गेस्ट रूम में जाकर सोती हूँ। तो में सोने के लिए चली गई और में बाहर से तो बहुत खुश नजर आ रही थी.. लेकिन अंदर से बहुत दुखी थी। मेरे मन में यही बात खाए जा रही थी कि आज से मेरे पति का प्यार आधा हो जाएगा और ऐसे ही सोचते सोचते मुझे पता ही नहीं चला कब मुझे नींद आ गई और में सो गई।

फिर सुबह जब में सुनील को चाय देने के लिए उसके कमरे में गई तो मैंने देखा कि वो दोनों पूरे नंगे होकर एक दूसरे से लिपट कर सोए हुए है और सुनील का लंड अभी तक पल्लवी की चूत के अंदर ही था और एक हाथ उसके बूब्स पर। तो मैंने दोनों को उठाया और चाय दी और हम सबने मिलकर चाय पी और पल्लवी नहाने चली गई। जब पल्लवी नहाने गई तो सुनील ने मुझसे पूछा कि क्या तुमने हम दोनों को माफ़ कर दिया है? तो मैंने बोला कि अगर मैंने माफ़ नहीं किया होता तो में पल्लवी को यहाँ पर नहीं बुलाती और तुम दोनों को अकेला चुदाई करने के लिए नहीं छोड़ती। तभी यह बात सुनकर सुनील ने खुश होकर मुझे गले लगाया और मुझे किस करने लगा। तो मैंने बोला कि आज से आपकी दो बीवियां है और आपको हम दोनों को खुश करना पड़ेगा। तो सुनील नाहकर ऑफिस चला गया। हम दोनों बैठकर बातें करने लगीं और प्लान करने लगी कि कैसे लाईफ को एन्जॉय किया जाए? और जब रात को सुनील ऑफिस से वापस घर आया तो हम दोनों उससे लिपटकर किस करने लगी। वो बहुत खुश होकर हम दोनों को बारी बारी किस करने लगा।

फिर हम सभी ने खाना खाया और सोने के लिए बेडरूम में आए.. मैंने और पल्लवी ने पारदर्शी गाऊन पहन लिया जो कि मुश्किल से कमर से थोड़ा नीचे था और हमारा बाकी जिस्म नंगा था और हम दोनों ने अंदर कुछ भी नहीं पहना था। फिर जब सुनील रूम के अंदर आया तो हम दोनों को इस तरह से देखकर बहुत खुश हो गया और में सुनील का एक हाथ पकड़ कर उसे चूमने लगी। तभी पल्लवी ने अचानक से उसका बरमूडा पकड़ा और खींचकर उसको नंगा कर दिया और उसके लंड को मुहं में लेकर चूसने लगी। तो सुनील ने अपनी एक ऊँगली मेरी चूत के अंदर डाली और ऊँगली करने लगा.. तभी उसने अपने हाथ की स्पीड बढ़ा दी और मुझे ज़ोर ज़ोर से ऊँगली करने लगा और फिर करीब 10 मिनट के बाद मेरी चूत से गरम पानी की नदी बहने लगी और मेरी चूत से निकला हुआ लावा जांघो से होता हुआ बेड पर गिरने लगा।

तभी सुनील बारी बारी से हम दोनों की चूत को फैलाकर अपनी जीभ से कुत्ते की तरह चाटने लगा और हमारा सारा रस पीने लगा और कहने लगा कि बीवी हो तो ऐसी। तो में सुनील का लंड मुहं में लेकर चूसने लगी तभी सुनील ज़ोर ज़ोर से मेरे मुहं में धक्के देने लगा और थोड़ी देर के बाद सुनील का सारा रस मेरे मुहं के अंदर चला गया। दोस्तों.. आज से पहले कभी भी मैंने उसके लंड को मुहं में नहीं लिया था और ना ही टेस्ट किया था.. लेकिन मुझे उसके लंड के रस का एक अजीब सा स्वाद मिला और फिर मैंने सारा रस पी लिया और हम दोनों बारी बारी उसका लंड चूसने लगे। फिर सुनील हम दोनों को लेटाकर चोदने लगा.. कभी मेरी चूत में तो कभी पल्लवी की चूत में अपना लंड डालने लगा और यह सब करते हुए हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। उस रात हम लोगों ने 5 बार चुदाई करवाई।

दोस्तों.. में अपनी लाईफ में अपने दिन कैसे गुजार रही हूँ? और सुनील हम दोनों को किस तरह चोद रहा है? हम दोनों अपनी चुदाई से कितने खुश है? यह सब में आप सभी को अपनी अगली स्टोरी में बताउंगी ।।

मुझे बूढ़े ने चोदा दोस्त की शादी में

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम ज्योति है और मैंने एक दिन थोड़ी ख़ुशी के लिए ज़िंदगी भर अपने आप में एक अज़ीब सी फीलिंग ले ली और अपनी नज़र में गिर गयी, काश वो दिन मेरी ज़िंदगी से निकल जाए, लेकिन जो समय बीत जाता है वो ख़त्म नहीं किया जा सकता, लेकिन आप लोग कहानी को पढ़े और देखे कि मैंने ऐसा क्या कर लिया था?

ये मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी है जो एक महीने पहले हुई थी। मेरी उम्र 28 साल है और मेरी शादी को 6 महीने हुए है। में अपनी दोंस्त की शादी में अपने पति (गणेश) के साथ गयी थी और फिर रात के 9 बजे हम लोगों ने खाना खाया और दोस्त से बोली कि हम लोग जा रहे है और फिर उसने बोला कि रुक जाओ सुबह चले जाना तो गणेश बोले कि तुम रुक जाओ में सुबह तुम्हें लेने आ जाऊंगा। फिर में रुक गयी और रात के 1 बजे मुझे नींद आने लगी तो में ऊपर सोने आ गई तो मैंने देखा कि सब रूम भरे है तो में हॉल में गयी तो हॉल में सब लोग सोए है और लास्ट में एक गद्दा खाली था और सब लोग चादर ओढ़े थे लेकिन मेरे पास कोई चादर नहीं थी। और मेरे बगल में कोई 60-62 साल का गावं का बूड़ा सोया था। फिर में वहीं लेट गयी और सो गयी। उस हॉल में ए.सी. था और मेरे बगल में कूलर चल रहा था तो वो हॉल काफ़ी ठंडा था।

फिर रात में मुझे ठंड लगी तो में उस बूढ़े की तरफ़ सरकी तो उसने मुझे अपनी चादर ओढ़ा दी और में सो गयी। अब रात में मुझे लगा कि वो बूड़ा मेरी तरफ़ चिपक गया और मुझे अपनी तरफ़ पीछे खींचकर मुझे चिपका लिया। अब मुझे उसका स्पर्श काफ़ी अच्छा लगा तो अब में भी पीछे सरक गयी और मज़े लेने लगी कि बूड़ा क्या करता है? फिर उसने मेरी जांघ पर हाथ फैरते हुए मेरी साड़ी ऊपर कर दी और मेरी कमर पर अपना पैर रख दिया और मेरा ब्लाउज खोलने लगा और मेरे ब्लाउज के हुक खोलकर निकाल दिया। अब मुझे मज़ा आ रहा था और अब मुझे उसका स्पर्श गणेश से अच्छा लग रहा था। फिर वो मेरी ब्रा खोलने लगा और मेरा मुँह अपनी तरफ कर लिया और मुझे किस करते हुए मेरी ब्रा निकाल दी। फिर उसने मुझे अपना लंड पकड़ा दिया, वो केवल अंडरवियर में था तो अब में भी उसका लंड सहलाने लगी और उसने मेरी पेंटी निकाल दी। फिर मेरे बूब्स को चूसने लगा तो अब में एकदम मस्त हो गयी और फिर अब वो मेरे बूब्स चूसते हुए मेरी चूत पर हाथ फैरता हुआ अपनी जीभ से मेरी चूत के दाने को चाटने लगा तो अब में पागल सी हो गयी।

तभी किसी ने लाईट जला दी तो में एकदम डर गयी और फिर लाईट बंद हो गयी। फिर मेरे बगल में जगह देखकर कोई लेट गया, क्योंकि में बूढ़े से चिपक गयी थी तो मेरे बगल में जगह हो गयी थी। अब इधर में घबरा रही थी और उधर वो बूड़ा नीचे मेरी चूत को चाट-चाटकर पागल कर रहा था। फिर मेरा ध्यान मेरे ब्लाउज और ब्रा पर गया तो मुझे याद आया कि मेरी ब्रा और ब्लाउज उस बिस्तर पर है तो अब में घबरा गयी और अब मेरा मन चुदाई से हटकर मेरे कपड़ो पर गया। फिर में उस बूढ़े को हटाने लगी तो वो बोलने लगा कि रूको और मुझे पकड़ लिया। अब में फंस गयी थी और अब मुझे बेचैनी सी होने लगी। फिर उधर वो पीछे वाला आदमी मेरी चादर में घुसने लगा और मेरी गांड पर हाथ फैरने लगा तो अब मुझे लगा कि वो समझ गया है कि बगल में क्या हो रहा है? अब मुझे लगा कि ज्योति आज तो तू मरी। फिर पीछे वाला आदमी मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखने लगा तो उसने धोती पहनी थी और फिर उसने अपनी धोती साईड में करके अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया। इधर वो पहले वाला बूड़ा मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगा और अपना लंड मेरी चूत पर टिकाकर अंदर करने लगा।

फिर एक दो बार तो उसका लंड फिसला, लेकिन तीसरी बार बूढ़े का लंड मेरी चूत में थोड़ा सा अन्दर घुस गया तो मेरे मुँह से आह्ह कि आवाज़ निकल गयी और में पीछे सरक गयी। फिर पीछे वाला आदमी अपना लंड मेरी गांड के छेद पर थूक लगाकर सेट करने लगा और अंदर करने लगा। अब मेरी गांड फटने लगी कि में कहाँ फंस गयी? अब मुझे पसीना आ गया था और इधर वो पहले वाला बूड़ा अपना लंड हिला-हिलाकर मेरी चुदाई करने लगा था। अब मुझे पीछे से दूसरे आदमी का डर था कि ये कौन है? और में उसका लंड मेरी गांड में नहीं घुसने दे रही थी। अब में अपनी गांड टाईट कर रही थी और वो पीछे पेलने में लगा हुआ था। इधर मुझे लगा कि वो पहले वाला बूड़ा झड़ने वाला है तो में उसे हटाने लगी, लेकिन उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और तीन चार धक्कों में झड़ गया, अब में रोने लगी थी, क्योंकि मुझे अभी बच्चा नहीं चाहिए था और गणेश तो हमेशा कंडोम का उपयोग करते थे।

अब में इस चुदाई से परेशान होने लगी और उस बूढ़े ने अपना लंड निकालकर अपना अंडरवियर पहना और अलग हो गया। अब पीछे वाले आदमी ने मुझे दूसरी तरफ खींच लिया और चादर से बाहर कर दिया और मेरी टाँगे चौड़ी करके मेरे ऊपर आ गया और अपना लंड मेरी चूत पर रखकर अंदर करने लगा, उसका लंड बहुत मोटा था। अब मेरी चूत गीली होने के कारण उसका लंड झट से मेरी चूत में घुस गया, लेकिन वो लंबा लंड मुझे तब मालूम हुआ जब वो अंदर रुका और वो मेरे मुँह पर आकर किस करने लगा। फिर मैंने देखा कि उसने ड्रिंक किया है और वो भी बूड़ा है। अब ड्रिंक की वजह से वो अगल बगल ध्यान नहीं दे रहा था और ना ही डर रहा था। अब उसने मेरी चुदाई जोर-जोर से करनी शुरू कर दी।

अब मुझे लगा कि वो भी झड़ने वाला है तो में उसे भी हटाने लगी, लेकिन वो मुझे कसकर पकड़कर चोदने लगा। और फिर थोड़ी देर में वो मेरी चूत में झड़ गया। फिर मैंने उसे तुरंत हटाया और अपना ब्लाउज ब्रा लिया और हॉल के बाथरूम में चली गयी। फिर जब में वापस आई तो हॉल की लाईट जल रही थी और फिर वो दोनों बूढ़े मुझे देखने लगे। फिर मैंने देखा कि वो दोनों बूढ़े बहुत गंदे थे और अब लाईट की वजह से और लोग भी आँख खोल रहे थे, इसलिए मैंने अपनी पेंटी को ढूंढना ठीक नहीं समझा और वहाँ से बाहर निकल गयी और मेरी दोस्त की माँ के पास आ गयी। अब वो मेरी सबसे बड़ी ग़लती थी, लेकिन आदमी को एक ग़लती माफ़ होती है, अभी मेरे पीरीयड हो गये है और अब सब ठीक है। में इस चुदाई का आनंद तो नहीं ले सकी, लेकिन आपको मेरी कहानी में मज़ा आया होगा ।।

धन्यवाद …

पापा का मोटा लंड

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम कविता है। यह कहानी पड़ने से पहले लड़के अपना लंड पकड़ लें और लड़कियां अपनी चूत में उंगली डाल लें ताकि स्टोरी पड़ने में ज़्यादा मज़ा आएगा और जब स्टोरी एक गरम, मुकाम पर पहुंचेगी तो लड़कों को मुठ मारना और लड़कियों को उंगली से चुदाई करना आसान रहेगा। जिन लडकियों को गाजर, मूली, खीर या लंबे बैंगन से अपनी गरम और टपकती हुई चूत ठंडी करने का शौक है वो भी जिस चीज़ से चूत ठंडी करती है वो अपनी चूत में फिट कर लें। पाठकों में अब अपनी कहानी पर आती हूँ।

दोस्तों में दिल्ली की रहने वाली हूँ। में एक पढ़ी-लिखी इंजिनियर हूँ.. में गुडगाँव में एक प्राईवेट कम्पनी में सॉफ्टवेर इंजिनियर की नौकरी करती हूँ। मेरी उम्र 24 साल है.. रंग गोरा, बदन गदराया हुआ और मेरा साईज 34-28-36 है और में जब चलती हूँ तो लंबे बाल चूतड़ पर एक सांप की तरह लहराते है और ऐसा लगता है कि एक काला नाग मेरी गरम, सेक्सी गांड में घुसना चाहता है और मेरी झील की गहराई की तरह मदहोश कर देने वाली आंखे है.. लेकिन मेरा बदन बहुत हॉट और सेक्सी है। मेरा नाम कुछ भी हो.. लेकिन मेरे कॉलेज टाईम से ही मजनू टाईप के छोकरों ने मेरा नाम “चुदक्कड़ माल” रखा हुआ था। मेरा घर आगरा में है जहाँ पर मेरे पापा अपना खुद का व्यापार करते है और मेरा एक बड़ा भाई है.. जिसका नाम विक्रम है और वो भी दिल्ली में पिछले 7 सालों से रह है और करीब 5 साल पहले में भी अपनी पढ़ाई करने के लिए दिल्ली आ गयी और भैया के साथ दिल्ली में रहने लगी।

में बहुत कामुक स्वभाव की हूँ और मेरी पहली चुदाई मेरे एक बहुत नज़दीकी रिश्तेदार ने आज़ से 4 साल पहली की थी और में पिछले 4 सालों में सैकड़ो बार अलग अलग तरह से कई लंड से चुद चुकी हूँ। में उसमे चूत चुदाई, दोस्त के साथ चुदाई, दोस्त के दोस्त से चुदाई आदि। मैंने अभी तक जो भी लंड लिए उनका साईज़ 6 से 9 इंच और 2 से 3 इंच मोटा था। लंड अपनी चूत और गांड के होल में कम से कम 500-600 बार लिए हुए है। मैंने काले लंड, एकदम गोरे चिट्टे लंड, सीधे लंड और केले जैसे लंड से चुदाई करवाई है। दोस्तों में पूरी नंगी बैठकर स्टोरी लिख रही हूँ।

दोस्तों यह बात अप्रेल 2013 की है.. में अपने माता, पिता को मिलने आगरा गयी हुई थी। हमारा घर बहुत पुराना दो मंजिला बना हुआ है और मेरे माता, पिता का रूम नीचे वाली मंजिल पर है और मेरा रूम ऊपर पहली मंजिल पर है और घर में पुरानी डिज़ाईन की एक रोशनदान बनी हुई है यही कोई 8 फीट की ऊंचाई पर। में किस्मत से अपने माँ, पापा की चुदाई आज़ से लगभग 3 साल पहले ही देख चुकी थी। पापा, मम्मी को क्या चोद रहे थे जैसे कि एक घोड़ा, घोड़ी को चोद रहा हो। तब मैंने नई नई चुदाई देखी थी और इसलिए में शरम की वजह से ज्यादा देर तक उनकी चुदाई नहीं देख पा रही थी। आज फिर मेरे मन में उनकी चुदाई देखने की लालसा थी.. तो मैंने रात के 10.00 बजे खाना खाकर मम्मी और पापा को गुड नाईट बोला और ऊपर अपने रूम में चली गयी और फिर थोड़ी ही देर में नीचे वाली मंजिल की सभी लाइट बंद हो गई तो मुझे लगा कि अब मम्मी, पापा का चुदाई का कार्यक्रम शुरू होने वाला है और में बेड पर लेटे हुए सोच रही थी कि में आज़ फिर उनकी चुदाई देखूँगी। तो में उठकर नीचे वाली मंजिल की खुली छत पर टहलने लग गयी और थोड़ी ही देर में मुझे उनके रूम में से कुछ धीमी धीमी आवाजे सुनाई देने लगी। तो में दबे पैर छत से नीचे आ गयी और नीचे वाली मंजिल के रोशनदन जो कि मेरे कमरे के बिल्कुल पास है.. उसी में से अंदर देखने लगी। मैंने देखा कि मम्मी पूरी नंगी होकर नीचे थी और पापा उनके ऊपर चढ़कर लंड को चूत में धक्का लगा रहे थे और उनका गधे के समान 8 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा काला लंड मम्मी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था। फिर पापा पूरे जोश से एक नौजवान से भी बड़कर बहुत तेज़ी से लंड को उनकी चूत में एक पिस्टन की तरह अंदर बाहर कर रहे थे।

दोस्तों में पिछले चार सालों में लगभग 600 बार चुद चुकी हूँ.. लेकिन मैंने ऐसी दमदार चुदाई कभी नहीं देखी थी। फिर मेरी उंगलियां ना जाने कब मेरे गाऊन के अंदर मेरी चूत तक पहुँच गयी थी और दो उंगलियां तो अब चूत के अंदर बाहर हो रही थी। उधर मम्मी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी कि संजय तुम्हे कितनी बार कहा है कि थोड़ा आराम से चुदाई किया करो.. लेकिन तुम उल्टा ज्यादा तेज़ी से चुदाई शुरू कर देते हो और मुझे बिल्कुल एक कुतिया की तरह चोद देते हो। तो यह सुनते ही पापा का जोश और दुगुना हो गया और बोले कि ले कुतिया ले अब इस कुत्ते का 8 इंच लम्बा लंड सम्भाल और दुगनी तेजी से लंड अब चूत के अंदर बाहर करने लगे। तो मुझे लगता था कि जैसे मम्मी को चुदाई में कोई रूचि ही नहीं थी.. वो तो बुझे मन से कभी आह्ह्ह, कभी ऊहह, कभी मार डाला रे बोल रही थी। फिर इधर मेरी चूत में अब तीन उंगलियां अंदर बाहर हो रही थी और में सोच रही थी कि काश में मम्मी की जगह चुद रही होती तो कितने मजे से चुदवाती और शायद मम्मी पिछली 28 साल से पापा से चुदकर अब पूरी तरह से ऊब चुकी थी और सिर्फ़ पति घर्म निभाने के लिए चुदवा रही थी।

फिर उधर पापा ने अपनी स्पीड और तेज कर दी और मुझे खिड़की से पापा का लंड और जांघो से मम्मी की चूत के टकराने की आवाज़े ठप, ठप्प, छप बिल्कुल अच्छी तरह सुनाई दे रही थी और हर आवाज़ मुझे पागल सी किए जा रही थी और अब मेरी चारों उंगलियां मेरी चूत में अंदर बाहर हो रही थी और मेरे मुहं से भी अहह ओफ्फ्फ की आवाजे बहुत धीमी आवाज़ में आ रही थी। फिर मुझे लग रहा था कि अब मेरी चूत का लावा निकलने वाला है और में अपने मुहं से निकलती हुई आवाजों को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.. इसलिए में खिड़की को छोड़कर दबे पैर छत पर आ गयी और अपनी चूत में पूरा हाथ डाल दिया और बहुत तेज़ी से अंदर बाहर करते हुए बहुत ज़ोर से सिसकियाँ कर रही थी। फिर लगभग 5-7 मिनट के बाद मेरे हाथ रुक गए और में चीख मारकर झड़ गयी और मेरी चूत से शायद आधा ग्लास जूस निकला होगा। यह मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा झड़ना था और में अपने पूरे हाथ को चूत में डालती फिर बाहर निकलती और पूरे हाथ को अपने मुहं में डाल रही थी। इस तरह मैंने वो आधा ग्लास के लगभग चूत का रस चाट लिया और में अब अपने को बहुत हल्का महसूस कर रही थी.. लेकिन नीचे से आती चुदाई की आवाज़ो ने फिर से मुझे खिड़की के रोशनदान के पास लाकर खड़ा किया और मेरे मन में कोई भी डर या संकोच नहीं था कि में अपने माता, पिता की चुदाई का आनंद ले रही हूँ। तब मुझे पापा की आवाज़ सुनाई दी.. नेहा रानी अब कुतिया बन ज़ाओ.. में तुम्हे अब पीछे से अपना लोहे जैसा लंबा लंड चूत में डालकर चोदूंगा। तो नेहा रानी का जवाब तो बिल्कुल निराशाजनक जनक था.. में दो बार झड़ चुकी हूँ अब ज़ल्दी से कुतिया बनाकर चोदो और पीछा छोड़ो मेरी इस चूत का। तो मम्मी किसी रोबोट की तरह बेड से उठी और बेड के साईड अपने दोनों हाथों से पकड़ कर घोड़ी बन गयी। मुझे उनकी चूत से निकलता हुआ रस उनकी जांघो पर बहता हुआ साफ साफ दिखाई दे रहा था। तो पापा का लंड मम्मी की चूत के जूस से बिल्कुल भीगा हुआ था और एक काला मूसल लग रहा था.. पापा ने अपने दोनों हाथों से मम्मी की जांघो का रस समेट लिया और फटाफट उस रस को अपने मुहं के हवाले किया और चटकारे लेकर चाट गए।

फिर बोले कि ले कुतिया की औलाद मेरे इस खम्बे जैसे लंड को संभाल और अपना लंड फच्च की आवाज़ के साथ मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया। तो मम्मी ने ज़ोर की सिसकियों के साथ उस डंडे जैसे काले लंड को अपनी चूत के होल में ले लिया। तो अब पापा फिर से गधे जैसे लंड को बहुत तेज़ी से अंदर बाहर करने लगे और साथ ही साथ थोड़ी देर बाद मम्मी की 44 इंच मोटे चूतड़ पर ज़ोर का थप्पड़ मारते और बोलते मेरी नेहा रानी का अब क्या हाल है? तो मम्मी कोई भी जवाब नहीं दे रही थी.. लेकिन वो किसी पत्थर की मूरत की तरह चुपचाप चुद रही थी। तो में मम्मी के इस तरह के व्यहवार को नहीं समझ पा रही थी और मुझे तो बाद में पता चला कि मम्मी की अब सेक्स और चुदाई में कोई रुची नहीं है.. वो तो अब धार्मिक जीवन जीना चाहती है और पापा को यह सब बातों से बहुत चिढ़ थी और वो अपनी जिंदगी को इसी तरह सेक्स करके आगे बड़ाना चाहते थे।

दोस्तों मेरी चूत फिर से गीली होने लगी और मेरा दिल कर रहा था कि मम्मी की जगह में जाकर कुतिया बन ज़ाऊ और पापा के लंड से जबर्दस्त चुदाई करवाऊँ.. लेकिन मेरे मन में पता नहीं कहाँ से ख्याल आया और में तुरंत खिड़की के गोले में लगी हुए काली रेलिंग पर बैठ गयी और उस रेलिंग को पापा का लंड समझकर उस पर अपनी चूत और गांड रगड़ने लग गयी। मेरी चूत के रस ने उस रेलिंग को जैसे नया पेंट कर दिया हो उस तरह चमका दिया। उधर पापा लगातार मम्मी को चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहे थे और उनका लंड ठप्प ठप की आवाज़े निकालता हुआ मम्मी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था। फिर बीच बीच में पापा बड़ी बेरहमी से मम्मी की 40 साईज़ के दोनों खरबूजों को भी दबा देते थे और मम्मी सिर्फ़ गुस्से से पापा को देखकर रह ज़ाती थी। हर आवाज़ के साथ साथ में और ज्यादा गरम हो रही थी और में अपनी चूत के रस से रेलिंग के पाईप को गीला करती हुई नीचे भी गिरा रही थी और में बहुत हैरान थी कि पापा के अंदर वो कौन सी ताक़त है जो अब तक लगभग 35 मिनट की घमासान चुदाई के बावजूद नहीं झडे थे।

दोस्तों मैंने इतना ताकतवर लंड इस उम्र में किसी का भी नहीं देखा था और मुझे बाद में पता लगा कि पापा योगा करके अपनी सेक्स पावर को ठीक रखते है। मेरी माँ अपनी मर्जी के बगेर नीचे पड़ी पड़ी पापा के लोहे जैसे लंड से चुद रही थी और ऊपर बेटी लोहे के काले पाईप को लंड बनाकर चुद रही थी। फिर में अपनी चूत और गांड को बहुत तेज़ी से पाईप के लंड पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी और मेरे मुहं से अब सिसकियों की आवाज़े आने लगी थी.. इसलिए मैंने तुरंत अपने गाऊन को उतारा और अपने मुहं पर बांध लिया ताकी मेरी चीख मम्मी या पापा ना सुन सके और फिर अगले 4-5 मिनट में एक ज़ोर की चीख मारकर पाईप के ऊपर ही झड़ गयी और फिर मेरी चूत कोई 3-4 मिनट तक फव्वारे की तरह पानी छोड़ती रही.. इतना पानी कि सारा पाईप तो गीला हो गया और कुछ पानी पाईप से नीचे भी टपक गया था। में उस पानी को फटाफट चाट गयी और इस बीच में शायद अपनी चूत को झाड़ने में इतनी मग्न थी कि मुझे पता ही नहीं लगा कि कब पापा, मम्मी ने चुदाई का पोज़ बदल लिया और अब पापा बेड पर सीधे लेटे हुए थे और मम्मी, पापा के ऊपर चड़ी हुई थी और उनकी चूत को पापा उछल उछलकर फाड़ने की कोशिश कर रहे थे। मम्मी बस एक रोबोट की तरह उनके ऊपर चड़ी हुई थी और बस सिसकियाँ ले रही थी और पापा का लंड उनकी चूत में सटासट अंदर बाहर हो रहा था। में पिछले 30 मिनट में दो बार झड़ चुकी थी और मेरे पैरों में भी अब ज्यादा देर खड़े रहने की ताकत नहीं थी। में उस पाईप पर नंगी बैठ गयी और उस जबरदस्त चुदाई को देखती रही। तभी मम्मी बोली कि अब निकालो भी अपने लंड से रबड़ी.. में तो अब तीसरी बार झड़ रही हूँ तभी मम्मी के शरीर में जैसे किसी ने बिजली का करंट लगा दिया हो.. उनके शरीर में अकड़ सी हुई और वो चीख मारकर झड़ गई।

में सोच रही थी कि मुझे भी ऐसा लंड मिल जाये तो में अपने आप को बहुत खुशकिस्मत समझूंगी। फिर शायद पापा को अब मम्मी पर तरस आ गया था और वो बोले कि नेहा रानी तुझे तीन पोज़ में चोदने के बावजूद मेरा मन नहीं भरा.. लेकिन में अब झड़ता हूँ और फिर पापा ने मम्मी को अलग किया और तुरंत उनके काले मोटे लंड से बहुत तेज़ी से सफेद रबड़ी निकलकर मम्मी के मुहं, बूब्स और पेट पर गिर रही थी। फिर में बहुत हैरानी से देख रही थी कि पापा का लंड बहुत तेज़ी से सफेद वीर्य की धार छोड़ रहा था। तो मम्मी पास पड़े हुए गाऊन को उठाने के लिए बड़ रही थी कि तभी मम्मी ने अपने दोनों हाथों से उस रबड़ी को लेते हुए अपने मुहं के हवाले कर दिया। मैंने ऐसा नजारा ना आज तक देखा था और ना ही कभी आगे देखने की उम्मीद थी। फिर नीचे अब उनकी चुदाई खत्म हो चुकी थी। मम्मी अपने शरीर को साफ करने के लिए टॉयलेट चली गई थी और पापा नंगे बेड पर लेटे हुए आराम कर रहे थे और मैंने भी अब वहाँ से खिसकने में ही भलाई समझी और दबे पैर अपने रूम में आ गयी और में बहुत थक गई थी इसलिए ज़ल्दी ही नंगी ही सो गयी ।।